Story For Kids in Hindi (बच्चों की कहानी) (1)

Most Read Story For Kids in Hindi | Baccho ki Kahani

आज के इस दौर में किताबें और कहानी पढ़ना किसे अच्छा नहीं लगता । आज हम आपके लिए बच्चों की मजेदार कहानियां (Story for kids in Hindi)लेकर आए हैं । बच्चों की कहानी(Bacho ki kahani) सिर्फ रोमांचक ही नहीं बल्कि यह नैतिकता का ज्ञान भी कराती है ।

शिवाजी महराज की सहनशीलता  | बच्चो की कहानी (Story for Kids in Hindi)

एक समय की बात है , शिवाजी महराज जंगले से कही जा रहे थे , वो अकेले ही यात्रा कर रहे थे । वो अभी कुछ ही दूर गए थे की एक पत्थर उनके सर पर आकर गिरा । वो चारों ओर देखने लगे की और बोले की “ये  पत्थर किसने फेका?” । तभी एक वृद्ध माता उनके सामने आ गयी और बोली मैंने ये पत्थर फेका है  , क्युकी मुझे फल तोड़ने है और पेड़ पर पर चढ़ कर फल नहीं तोड़ सकती इसलिए ऐसा किया ।इस बात पर वीर शिवाजी क्रोधित नहीं हुए और ये सोचने लगे फल से भरा पेड़ जब इतना सहनशील हो सकता है तो मै क्यों नहीं।वो सारा दिन पत्थर खाते रहता है। वो प्रेमपूर्वक उस बूढी माता को स्वर्ण मुद्रा उपहार स्वरूप दिया ।

कहानी की शिक्षा (Moral of the Story) –

बच्चो क्रोध करना कोई बहादुरी का काम नहीं होता है , कमजोर, बुजुर्गो के प्रति प्रेम और दया करव के सब सहन कर लेना ही असली साहस का काम है । हमें हमेशा सहनशील बने रहना चाहिए और दूसरों को प्रेम से देखना चाहिए ।

सदा सत्य बोले | बच्चो की कहानियाँ (kids stories in Hindi)

एक समय की बात है युधिष्टिर जब बालक थे तब वो गुरुकुल में पढ़ा करते थे । वो जो पढते उसके जैसा ही व्यवहार करते । एक बार उनके गुरु द्रोण ने विद्यार्थियों को पाठ याद कराया “सदा सत्य बोलो , क्रोध ना करो “ अगले दिन जब कक्षा चालू हुई तो उन्होंने सभी शिष्यों से पूछा “ आप सब ने कितने पाठ याद किये है ?” किसी ने कहा – 10 पाठ याद किये; कोई बोला – 20 याद किये है।

जब युधिस्ठिर की बारी आई तो वो डरते डरते बोले – मैंने सिर्फ 2 वाक्य याद किये है । इसपर उनके गुरु को क्रोध आ गया और उन्होंने छड़ी से उनकी पिटाई कर दी फिर उन्होंने पूछा “तुम्हे कौन से 2 वाक्य  याद किये है “ युधिष्ठिर बोले “ सदा सत्य बोलो और क्रोध ना करो “  जब आप मुझे मार रहे तब मुझे क्रोध आ रहा था लेकिन मैंने खुद को समझा रहा था की क्रोध नहीं करना चाहिए । यह सुनकर उनके गुरु द्रोण उन्हें खुश होकर गले लगा लिया और कहा “सच्ची शिक्षा तुमने ही सीखी है ।

कहानी की शिक्षा (Moral of the Story) –

बच्चो हम जो किताबों में पढते है उन्हें अपने जीवन में वैसा करना सीखना भी चाहिए । तभी हम सच्चे ढंग शिश्चित हो पाएगे। सिर्फ किताबे रट लेने से कोई विद्वान नहीं हो जाता है ।    

जलन का  फल | बच्चो की कहानियाँ (Hindi Story for kids)

एक ग़ाव में एक जलनखोर किसान रहता था , जिसका नाम था सुबू । वो फसल बेच कर अच्छे पैसे कमाता था लेकिन उसको उससे संतुस्ती नहीं होती थी । वो हमेशा दुसरे किसानों से जलता था और उन्हें परेशान करता था । वे उनके फसल जला देता था या नीलगाय उनके खेत में छोड़ कर उनके फसल को बर्बाद करा देता था । उसके इस व्यवहार से हर कोई उसे पसंद नहीं करता था । उसी ग़ाव में एक नंदू किसान रहता था , वो गरीब था । उसका एक बेटा था “ मनु “ । मनु शहर में खेती की पढाई करता था । उसके पिता ने बड़ी मुश्किल से उसे पढाया था । मनु जब पढाई पूरी कर के घर आया था तब उसे अपने पिता से कहा – “मैंने जो पढाई की है उसमे आर्यवेदिक पौधों को पैदा कर सकता हू , अपने खेत पर हम इसे पैदा करेगे और बड़े शहर में बेच दूंगा , जिससे हमे खूब पैसे आयेगे और अपना घर बनायेगे।

अगले दिन पिता और पुत्र इसकी तैयारी  अपने खेत में करने लगे । बगल के खेत में सुबू ये सब देख रहा था । उसने पूछा- “आप लोग ये क्या कर रहे हो?” तो मनु ने बोला ने बोला- “हम एक आर्युवेदिक पौधे लगा रहे है जिसकी मांग शहर में बहुत है और काफी मुनाफा है”। ये बात सुनकर सुबू अंदर ही अंदर जल गया और वहा से चला गया।  कुछ दिन बाद एक महामारी आयीं जिससे काफी लोग सही दवा नहीं मिलने के कारण मर गए । जिस पौधे से दवा बननी थी वो कम पर गयी । मनु ने भी इसी पौधे की खेती की थी , अब वो बस तैयार होने वाले थे ।मनु ने दवा कंपनी को फ़ोन कर आने के लिए कहा था । चुकी सुबू जलता था तो उसे सोचा की अगर ये पौधे बिक गए तो गरीब नंदू मुझसे ज्यादा अमीर हो जायेगा इसलिए उसने एक योजना बनाई जिससे उसके खेत बर्बाद हो जाये ।

उसने अपनी पुरानी आदत के अनुसार रात को खेत में आवारा पशु छोड़ दिए । पशु ने सारे फसल को ख़राब कर दिया । अगले दिन सुबह जब नंदू और मनु आए तो ये देख कर दुखी हो गए । दवा कम्पनी वाले वापस लौट गए और बोले की काश इन आर्यवेदिक पौधों से कितनो की जान बच सकती थी । महामारी शहर में फ़ैल गयी और दवा की कमी हो गयी । उसी बीमारी से सुबू किसान का बेटा बीजू जो उसी शहर में रहता था वो मर गया । जब ये बात उसे पता चली तो वो फुट –फुट कर रो पड़ा , नंदू के पाँव पर गिर कर बोला – “आज मैंने अपने जलन की भावना के कारण अपना बेटा खो दिया ।

 कहानी की शिक्षा (Moral of the Story) – 

हमें कभी भी किसी से जलना नहीं चाहिए , हमेशा दूसरों का अच्छा देख कर खुश होना चाहिए क्युकी दूसरों की सफलता में अपना भी भला होता है ।

लालच का परिणाम | बच्चो की कहानियाँ(Bacho ki kahaniyan)

जगतपुरी नाम के ग़ाव में के बिंदु नाम का व्यपारी रहता था वो अन्नाज बेचा करता था , वो स्वभाव से लालची था। हमेशा ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने की फ़िराक में रहता था , उसके पास एक नाव था जिससे वो नदी पार कर के शहर जाकर अपना समान लाया करता था । एक बार की बात है वो ऐसे ही शहर गया था आनाज लाने। वो जब शाम को वापस आ रहा था तो उसे देखा की उसके साथ का  कपडे व्यापारी बेहोश पड़ा है और उसका सामन भी गिरा पड़ा है । यह देख कर उसने सोचा  “अच्छा मौका है” आज फ्री में कपडे भी मिल रहे है वैसे भी ये दूसरें ग़ाव का है अगर मै इसके कपडे बेच दू तो क्या किसी को क्या पता चलेगा “।

उसने वो कपड़े उठा लिए और आगे बढ़ गया वो अभी नदी किनारे पंहुचा ही था की उसे डाकूवों ने देख लिया और सोचा की ये यही कपडे वाला व्यपारी है जो काफी धनवान है चलो आज इससे लुटते है काफी दिन के बाद हमारे जाल में आया है । वो बिंदु के करीब गए और उसे घेर लिया और कपडे के साथ उसका अन्नाज भी लूट लिया। बिंदु सर पटक कर रोने लगा की उसने आज ये क्या कर दिया “काश वो बस अपना समान ले जाता तो ऐसी नौबत नहीं आती ।

 कहानी की शिक्षा (Moral of the Story) – 

हमेशा हमें अपने धन से संस्तुष रहना चाहिए , दूसरों का धन देख कर लालच नहीं करना चाहिए  , नहीं तो हमें भी बिंदु के जैसा भोगना पड़ेगा । 

मेहनत का फल  | बच्चो की कहानियाँ (Bccho ki kahani)

एक नदी के किनारे एक पेड़ था उसपर एक मैना – मैनी अपने घोसले में रहते थे , एक बार मैनी ने एक अंडा दिया । उसी रात को तेज हवा चली और उनके अंडे गिर कर नदी में चले गए । यह देखकर दोनों रोने लगे और नीचे उतर आए और सुबह का इंतजार करें लगे । वो अगल बड़े छोटे- छोटे ककड़ को अपनी चोंच में दबाकर उस नदी में डाल देते थे ।

ये वो सारा दिन कर ही रहे थे तभी पास बैठा कछुवा उन्हें ये करते हुए देख रहा था । वो उनके समीप गया और पूछा “आप लोग क्या कर रहे है ?” मैना बोला हमारे अंडे नदी में गिर गए है , हम इनसब ककड़ से ये नदी भर देंगे और अपनी अंडे को निकाल देंगे”। यह सुनकर कछुवा बोला आप लोग चिंता ना करे मै आपकी मदद करुगा”। वो झट से नदी में गया और उनका अंडे लेकर बाहर निकल गया और उनके अंडे उन्हें वापस कर दिए । मैना और मैनी ने उसे धन्यवाद कहा और अपने अंडे को लेकर घोसले में आ गए ।

कहानी की शिक्षा (Moral of the Story) – 

परिस्थतिया कितनी भी बुरी क्यों ना हो हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए , जब हम कठिनाई से लड़ते है तो हमारी मदद के लिए भगवान किसी ना किसी को भेज देते है ।

गुरु नानक और चोर | प्रसिद्ध बच्चों की कहानी( famous story for kids)

एक ग़ाव में एक चोर रहता था वो अपनी चोरी की आदतों से स्वयं परेशान रहता था वो कई बार चोरी छोड़ना चाहता था लेनी छोड़ नहीं पाता था । उसने कई बार कोशिश की पर असफल रहा । अंत में वो परेशान हो कर गुरुनानक जी के पास गया और उनसे बोला “मै चोर हु और चोरी छोड़ना चाहता हु कोई उपाय बताए”। गुरुनानक जी ने उसे जितने उपाय बताए वो उससे नहीं निभते थे ।

अनेकों उपाय लगाये गए लेकिन वो सारे विफल हो जाते । वो अब पूरा उदास होकर उनके पास फिर गया और बोला “ आपने जितने तरीके बताए सब विफल रहे मै किसी को नहीं निभा पाया । अंत में गुरुनानक जी कहा तुम अपनी चोरी की आदतों को सबके सामने जा कर कहो । इसके बाद चोर का आना बंद हो गया । उसको अपनी बुरी आदत बताने में लज्जा आने लगी और उसकी ये बुराई समाप्त हो गयी ।

 कहानी की शिक्षा (Moral of the Story) –

हम अपनी कोई भी बुराई को हरा सकते है अगर हमें उसे समाप्त करने का उचित तरीका पता हो ।

साहसी बगुला  | बच्चो की कहानियाँ(Story for childrens)

मयुरवन के किनारे एक  बिटू बगुला का रहता था , वो पास के तालब में तैरते , खाते –पीते और शांति से रहता था। वो सभी जानवरों और चिड़िया से मिलकर रहते था  । पुकु खरगोश उसका सबसे प्रिय मित्र था । वो उसके साथ घुमने जाया करता था , और दोनों एक दुसरे के घर जाया करते थे और जम कर मस्ती किया करते थे । उसी जंगले में लिली लोमड़ी रहती थी , वो बहुत ही दुष्ट और चालक थी । वो जंगल के मासूम जानवर को खा जाती थी । वो उन्हें किसी तरह के जाल में फ़सा कर खा जाती थी ।

उसने पुकु खरगोश को देख कर एक योजना बनाई- “ क्यों ना इसे खा जाऊ “ । चालक लोमड़ी ने खरगोश को देख कर तरकीब लगायी ।  उससे कहुगी की तुम्हारे दोस्त बिटू को मगरमच्छ खा रहा है  जब वो भागेगा तालाब की ओर तब फस जाएगा । उसने तालब की किनारी झाड़ी में एक जाल लगा दिया और  जाकर पुकु को बोली की तुमहरा दोस्त को मगरमच्छ ने पकड़ लिया है जा कर उसकी मदद करो , खरगोश जैसे ही झाड़ी के पास पंहुचा वो जाल में फ़स गया अब लोमड़ी ने उसे अपने दांतों में दबा दिया।

पुकु जोर- जोर से चिलाने लगा । कई जानवर इसे ध्यान से देख रहे थे पर उस खूंखार लोमड़ी से लड़ने की हिम्मत किसी को ना हुई ।इतने में बगुला आ गया औऔर ये देख कर गुस्से से भर गया उसने हिम्मत के साथ अपनी बड़ी चोंच को लोमड़ी की आँख में धसा दिया जिससे लोमड़ी उसके दोस्त को छोड़ कर रोते –रोते भाग गयी ।

कहानी की शिक्षा (Moral of the Story) –  

हम अंदर से काफी शक्तिशाली है हमें कभी भी अपने आप को निर्बल नहीं समझना भले सामने कितन बड़ा संकट क्यों ना हो ।

आलस का परिणाम | बच्चो की कहानियाँ(Story for kids in Hindi)

एक ग़ाव में एक आलसी पेंटर रहता था उसका नाम कुमार। वो घरों की पेंटिंग करता था वैसे वो बहुत अच्छा काम करता था लेकिन बहुत बड़ा आलसी भी था । वो किसी काम को मन से नहीं करता था और अधुरा छोड़ देता था । एक दिन  दुसरे ग़ाव के सेठ ने उसे बुलायाजो नदी पार के दूसरी ओर गाव में रहते थे , और कहा की” मेरा घर और मेरी नाव पेंट कर दो”। जितनी तुम्हारी मजदूरी होगी मै तुम्हे उससे दोगुना धन   दूंगा । कुमार ये सुन के खुश हो गया और घर को पेंट करने लगा । उसने घर को काफी बढ़िया पेंट किया लेकिन जब नाव की बारी आई तो वो अब आलस के मूड में गया उसने सोचा की उसे क्या ठीक से पेंट करना जैसे मन वैसे कर देता हु ।

उसने जगह छोड़ छोड़ कर उसे रंग दिया और सेठ के पास चला गया । सेठ घर के रंग को देखकर काफी खुश हुए क्युकी  उन्होंने कभी इतनी बढ़िया रंगरोगन नहीं देखा था । उन्होंने उसे दोगुनी मजदूरी के साथ आनाज की बोरी और अपना नाव भी दे दिया ।कुमार काफी खुश हो गया और उसी नाव को लेकर नदी पार लगा की तभी अचानक नाव में पानी घुसने लगा  और देखते ही देखते पूरी नाव में पानी भर गया और नाव पर रखा आनाज और उसको मिला  दोगुना धन भी डूब गया । वो अपनी जान बचा कर नदी तैर कर भाग गया ।

कहानी की शिक्षा (Moral of the Story) –

हमें अपना काम पूरी ईमानदारी से करना चाहिए उसमे  आसल नहीं दिखाना चाहिए , नहीं तो अपना सब कुछ खो देंगे ।

स्वयं को कमजोर ना समझो | बच्चो की कहानियाँ(Story for kids in hindi)

बहुत समय की बात है एक शहर था बिन्दुपुर जो एक नदी के किनारे बसा था । उस छोटे शहर की सीमा चारों ओर नदी से घिरी हुई थी । ज्यादा बारिश से नदी का पानी शहर में ना चला जाए इसलिए चारों ओर दीवार लगायी बनायीं गयी थी । बिन्दुपुर में एक मोहन नाम का लड़का रहता था वो सीधे स्वभाव का था इस कारण लोग उसे मुर्ख समझे थे। वो अपनी कशा में फेल कर जाता था , सब बच्चे उसका मजाक उड़ाते थे , शिक्षक उसे डाटते थे । घर के लोग और पड़ोसी सब  ताना देते थे ।फिर भी वो खुश रखने की कोशिश करता था ।

दुनिया उसे कमजोर और निक्कमा समझते थे । एक बार वो शहर के किनारे दीवाल के पास घूम रहा था तबी उसने देखा की  दीवाल के उपरी भाग में एक छेद है । उसने देखा और अपने घर चला गया । कुछ देर बाद रात हो गयी और काफी तेज बारिश चालू हो गयी , बारिश काफी मुसलाधार थी । मोहन को अचानक ख्याल आया की दीवाल में एक छेद है अगर पानी ऊपर आ गया तो सारा पानी शहर में घुस जायेगा और सबकोई कोई डूब जायेगा । वो तेजी से घर से निकला और वहा जा कर छेद बंद करने की कोशिश करने लगा पर उसे कोई उपाय ना सुझा । पानी धीरे धीरे अंदर आने लगा। उसने एक तरकीब लगायी। उसने उस छेद में अपनी ऊँगली लगा दी और रात भर बारिश में भीगते भीगते खड़ा रहा । जब सुबह हुई तो शहर के लोगों ने देखा की वो दीवाल में ऊँगली डाले खड़ा है जब लोग करीब गए तो उन्हें पूरी घटना का पता चला । लोगो ने उसको अपने कंधे पर बिठाया और पुरे शहर में घुमाया ।

कहानी की शिक्षा (Moral of the Story) – 

हमें अपनी कमियों से उदास नहीं चाहिए और अपनी बुद्धि से अपनी शक्ति जाननी चाहिए ।

कर भला तो हो भला | बच्चो की कहानियाँ (Famous kids story in Hindi)

एक जंगल में एक चूहा था वो एक दिन कुछ भोजन की खोज में इधर उधर घूम रहा था तभी उसके पीछे एक बिल्ली घात लगाये बैठी थी । पेड़ पर बैठे बंदर ने ये देख लिया उसने उस बिल्ली पर एक पेड़ की टहनी तोड़ कर उसके ऊपर फेक दिया जिससे बिल्ली को चोट लगी और वो वहा से भाग गयी । चूहा बंदर को धन्यवाद कर के चल दिया । फिर कुछ दिन बाद जंगल में एक मदारी और शिकारी आए  जो बंदर पकड़ने के लिए पेड़ पर जाल बिछा दिए और बंदर को पकड़ भी लिया । इतने में चूहा वहा से गुजर रहा था उसने ये सब देख लिया और चुपके से जाकर जाल को काट दिया । बंदर जाल कटते ही चूहे को धन्यवाद दिया और भाग गया ।

कहानी की शिक्षा (Moral of the Story) – 

हमें हमेशा  दूसरों की भलाई का काम करना चाहिए भले हम उससे जानते हो भी या ना । सबके भला करने से अपना भला भो होता है ।

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